क्या बात है ?
* मेरे मुस्लिम और नॉन मुस्लिम भाइयों के लिए !
* आज कल सब क़ुरआन के आलीम बन बैठे है , और सवाल पूछने का बड़ा शोक सवार है , तो प्रिय मित्रो कान में तेल डाल कर सुने !
* और वेदों का ईश्वर कहा है और कैसा सा दिखता है ये भी देखेंगे ? 👍
NOTE : - केवल 2 पैरो वाले बुद्धि लोगो के लिए !
* प्रशन : - कहते है , की अल्लाह तआला कहा है और कैसा है ?
* उत्तर : -
* वो ऐसा है । *
अर्थात : - कुरान शरीफ - सूरा अल - इख़लास 112: 1 - 4
112:1 कहो: "वह अल्लाह यकता है,
112:2 अल्लाह निरपेक्ष (और सर्वाधार) है,
112:3 न वह जनिता है और न जन्य,
112:4 और न कोई उसका समकक्ष है ।
* पालनहार की जात स्वयं कदीम (अनादि),अजलि (सक्षम)औऱ अबदी
( अमर) उसी तरह उसके गुण(शिफात) भी । अनादि, सक्षम और अमर है।
* पालनहार की जात स्वयं कदीम (अनादि),अजलि (सक्षम)औऱ अबदी
( अमर) उसी तरह उसके गुण(शिफात) भी । अनादि, सक्षम और अमर है।
*अपनी अक्ल से उसकी पाक जात को समझना मुमकिन नही,क्योंकि जो चीज़ अक्ल के जरिये से समझ मे आति है अक्ल उसको अपने मे घेर ले लेती है, अल्लाह (एक ईश्वर)की शान यह है कि कोई चीज़ उसकी जात को घेर नही सकती।उसी तरह उसके गुण(सिफ़त) भी है।
* वो यहाँ है ?? *
अर्थात : -और बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं ।
( 50 : 16 )
* वो दिल के पास और शहरग
( वो रग है जो पूरे शरीर को खून पहुचती है )
उसे भी ज्यादा करीब है पालनहार ।
وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِى عَنِّى فَإِنِّى قَرِيبٌ أُجِيبُ دَعْوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِ فَلْيَسْتَجِيبُوا۟ لِى وَلْيُؤْمِنُوا۟ بِى لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَ
(ऐ रसूल) जब मेरे बन्दे मेरा हाल तुमसे पूछे तो (कह दो कि) मै उन के पास ही हूँ और जब मुझसे कोई दुआ माँगता है तो मै हर दुआ करने वालों की दुआ (सुन लेता हूँ और जो मुनासिब हो तो) क़ुबूल करता हूँ पस उन्हें चाहिए कि मेरा भी कहना माने) और मुझ पर ईमान लाएँ । ( 2 : 186 )
* प्रशन : - काबे खाना की पूजा करते हो ?
उत्तर :- मुसलमान केवल एक अल्लाह की पूजा करता है नाकि कोई बूत ( मूर्ति ) या कोई घर इत्यादि , की ।
* हा काबा एक अल्लाह की निशानियों में से एक निशानी है । जिसकी बुनियाद अल्लाह ने हज़रत आदम अहेस्लाम के हाथों से राखी थी परंतु कई कारणो से वह कई बार टुटा भी है फिर से बना भी है ।
उदहारण ० कॉम नूह पर अजाब जो कि पानी की शक्ल में आया था जब भी वह ठह गया था ।
* फिर अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम अहेस्लाम के हाथों से फिर उसकी की बुनियाद रखी
ताकि लोगो को एक दिशा मिल जाये की एक अल्लाह की पूजा इस तरफ करके करना है और सारे मानव जाति के लोग एक जगह जमा हो कर उसकी भक्ति के गुण गए , वहाँ न कोई कला , न कोई गोरा , न कोई अमीर , न कोई गरीब , न कोई अछूत , न कोई सर्वश्रेष्ठ पालनहार के सब बनाये होए है और सब एक आवाज़ में अपने रब की पाकी बयान करते है , एक सफेद लिबश में , ये है इस्लामिक शिक्षा सब मानव एक है कोई किसी से बढ़कर नही , हा अल्लाह के नजदिक वो शक्श पसंदिता है जो अल्लाह से डरे , परेजगारी इख्तियार करे ।
अर्थात : - और याद करो जब हमने इस घर (काबा) को लोगों को लिए केन्द्र और शान्तिस्थल बनाया - और, "इबराहीम के स्थल में से किसी जगह को नमाज़ की जगह बना लो!" - और इबराहीम और इसमाईल को ज़िम्मेदार बनाया। "तुम मेरे इस घर को तवाफ़ करनेवालों और एतिकाफ़ करनेवालों के लिए और रुकू और सजदा करनेवालों के लिए पाक-साफ़ रखो।"
( 2 : 125 )
अर्थात : - हम आकाश में तुम्हारे मुँह की गर्दिश देख रहे है, तो हम अवश्य ही तुम्हें उसी क़िबले का अधिकारी बना देंगे जिसे तुम पसन्द करते हो। अतः मस्जिदे हराम (काबा) की ओर अपना रूख़ करो। और जहाँ कहीं भी हो अपने मुँह उसी की ओर करो - निश्चय ही जिन लोगों को किताब मिली थी, वे भली-भाँति जानते है कि वही उनके रब की ओर से हक़ है, इसके बावजूद जो कुछ वे कर रहे है अल्लाह उससे बेखबर नहीं है !
( 2 : 144 )
उत्तर :- मुसलमान केवल एक अल्लाह की पूजा करता है नाकि कोई बूत ( मूर्ति ) या कोई घर इत्यादि , की ।
* हा काबा एक अल्लाह की निशानियों में से एक निशानी है । जिसकी बुनियाद अल्लाह ने हज़रत आदम अहेस्लाम के हाथों से राखी थी परंतु कई कारणो से वह कई बार टुटा भी है फिर से बना भी है ।
उदहारण ० कॉम नूह पर अजाब जो कि पानी की शक्ल में आया था जब भी वह ठह गया था ।
* फिर अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम अहेस्लाम के हाथों से फिर उसकी की बुनियाद रखी
ताकि लोगो को एक दिशा मिल जाये की एक अल्लाह की पूजा इस तरफ करके करना है और सारे मानव जाति के लोग एक जगह जमा हो कर उसकी भक्ति के गुण गए , वहाँ न कोई कला , न कोई गोरा , न कोई अमीर , न कोई गरीब , न कोई अछूत , न कोई सर्वश्रेष्ठ पालनहार के सब बनाये होए है और सब एक आवाज़ में अपने रब की पाकी बयान करते है , एक सफेद लिबश में , ये है इस्लामिक शिक्षा सब मानव एक है कोई किसी से बढ़कर नही , हा अल्लाह के नजदिक वो शक्श पसंदिता है जो अल्लाह से डरे , परेजगारी इख्तियार करे ।
* अब देख ते है इसका जिक्र *
( 2 : 125 )
अर्थात : - हम आकाश में तुम्हारे मुँह की गर्दिश देख रहे है, तो हम अवश्य ही तुम्हें उसी क़िबले का अधिकारी बना देंगे जिसे तुम पसन्द करते हो। अतः मस्जिदे हराम (काबा) की ओर अपना रूख़ करो। और जहाँ कहीं भी हो अपने मुँह उसी की ओर करो - निश्चय ही जिन लोगों को किताब मिली थी, वे भली-भाँति जानते है कि वही उनके रब की ओर से हक़ है, इसके बावजूद जो कुछ वे कर रहे है अल्लाह उससे बेखबर नहीं है !
( 2 : 144 )
* यहूदी सिर्फ बैतूल मुक़दस मस्जिद ए अक़्सा कोही अफजल समझे ते थे उनकी बताओ का रद्द ।
يْسَ الْبِرَّ أَن تُوَلُّوا وُجُوهَكُمْ قِبَلَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَلَٰكِنَّ الْبِرَّ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالْكِتَابِ وَالنَّبِيِّينَ وَآتَى الْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِ ذَوِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ وَالسَّائِلِينَ وَفِي الرِّقَابِ وَأَقَامَ الصَّلَاةَ وَآتَى الزَّكَاةَ وَالْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمْ إِذَا عَاهَدُوا ۖ وَالصَّابِرِينَ فِي الْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ وَحِينَ الْبَأْسِ ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ صَدَقُوا ۖ وَأُولَٰئِكَ
هُمُ الْمُتَّقُونَ -
अर्थात : - नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आख़िरत और फ़रिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावए ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है।
( 2 : 17 )
* मुसलमान सिर्फ एक सच्चे पालनहार की पूजा करता है नाकि काबे खाने की ।
😊😊😊😊😊😊
* और सब पहले मुसलमान ही थे ।
( एक पालनहार को मानने वाले )
كَانَ ٱلنَّاسُ أُمَّةً وَٰحِدَةً فَبَعَثَ ٱللَّهُ ٱلنَّبِيِّۦنَ مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ ٱلْكِتَٰبَ بِٱلْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ ٱلنَّاسِ فِيمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ وَمَا ٱخْتَلَفَ فِيهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ أُوتُوهُ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَٰتُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ فَهَدَى ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ مِنَ ٱلْحَقِّ بِإِذْنِهِۦ وَٱللَّهُ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ
अर्थात : - (पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुश ख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाज़िल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख्तेलाफ डाल रखा था और ख़ुदा जिस को चाहे
राहे रास्त की हिदायत करता है
(2:213)
إِنَّ ٱلدِّينَ عِندَ ٱللَّهِ ٱلْإِسْلَٰمُ وَمَا ٱخْتَلَفَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ وَمَن يَكْفُرْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
अर्थात : - दीन (धर्म) तो अल्लाह की स्पष्ट में इस्लाम ही है। जिन्हें किताब दी गई थी, उन्होंने तो इसमें इसके पश्चात विभेद किया कि ज्ञान उनके पास आ चुका था। ऐसा उन्होंने परस्पर दुराग्रह के कारण किया। जो अल्लाह की आयतों का इनकार करेगा तो अल्लाह भी जल्द हिसाब लेनेवाला है ।
( 3: 19 )
* क़ुरान अरबी में क्यों ?
हिंदी और दुसरी भाषा क्यों नही ?
* अर्थात : - यदि हम उसे ग़ैर अरबी क़ुरआन बनाते तो वे कहते कि "उसकी आयतें क्यों नहीं (हमारी भाषा में) खोलकर बयान की गई? यह क्या कि वाणी तो ग़ैर अरबी है और व्यक्ति अरबी?" कहो, "वह उन लोगों के लिए जो ईमान लाए मार्गदर्शन और आरोग्य है, किन्तु जो लोग ईमान नहीं ला रहे है उनके कानों में बोझ है और वह (क़ुरआन) उनके लिए अन्धापन (सिद्ध हो रहा) है, वे ऐसे है जिनको किसी दूर के स्थान से पुकारा जा रहा हो।" ( 41 :44 )
* अल्लाह ने हर कॉम में उनमे से ही उनकी भाषा मे संदेश भेजा , पर ईमान लाने के नही उनका क्या है अगर वो अरबी में हो या इंग्लिश में ?
* पर कर भी क्या सकते है इनका वैदिक ईश्वर जिसको केवल संस्कृत ही आती
उसको भला दूसरी भाषा से क्या लेना देना हो सकता है ?
😊😊😊😊😊😊
* आज कल एक प्रशन ज्यादा चर्चा में है कि अल्लाह ने सब किताबो में अलग अलग क्यों
लिखा है ? क्या अल्लाह का ज्ञान अधूरा है ?
( माजल्लाह )
* उत्तर : - अल्लाह के कलाम में किसी किताब से किसी किताब का अफजल होनो का हरगिज यह मतलब नही , की अल्लाह की कीताब कम या ज्यादा है , उसमे कोई कमी थी। क्यों कि पालनहार एक है और उसका कलाम भी एक है । और उसकी कोई किताब में कमी नही । क़ुरआन के अलावा अक्सर बाते उनके मानने वालों ने चेंज करदीं है । क़ुरआन वाहिद है जो मफूज है । अल्हम्दुलिल्लाह । पूरी की पूरी एक एक शब्द सही सलामत । अल्हम्दुलिल्लाह अलबत्ता क़ुरआन का पढ़ना सवाब मेंं ज्यादा है ।
1 शब्द के बदले 10 नेकी ।
* अर्थात : - ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है ( 5 : 15 )
* क्यों कि यहुदी कुछ आपने मतलब का बताते थे कुछ छुपा देते थे ।
* आज कल एक और भी है जो अपने आपको किताबी कहने लगा है , उनका दावा है कि कुछ भी निकाल सकते है ।
* मेरे मित्रो आप ही समझ जाये कि जो निकल सकते है वो डाल भी सकते हों इसी तरह किताबो में मिलावट करते थे ।
* अल्लाह के कलाम से छेड कानी नही की जाती इसलिए क़ुरआन एक एकता किताब है जो जैसी की वैसी है । अल्हम्दुलिल्लाह , दुनिया मे सबसे ज्यादा कोई याद करने वाली कोई किताब है वो क़ुरआन है । एक अनुमान एक मुताबिक हर साल 2 करोड़ लोग क़ुरआन को याद करते है वो भी मुह जबानी .
* कहते है कि अल्लाह शब्द इस्लाम से पहले बता दे ?
* अर्थात : - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (तुम को एख़तियार है) ख्वाह उसे अल्लाह (कहकर) पुकारो या रहमान कह कर पुकारो (ग़रज़) जिस नाम को भी पुकारो उसके तो सब नाम अच्छे (से अच्छे) हैं और (ऐ रसूल) न तो अपनी नमाज़ बहुत ऊँचा कर पढ़ो न और न बिल्कुल धीरे से बल्कि उसके दरमियान एक औसत तरीका एख्तेयार कर लो । ( 17 :110 )
* सब अच्छे नाम उसी के है ।
अल्लाह
अल रहमान
अल रहीम
अल करीम
अल मालिक
अल कुदुस
अल राजिक
अल गफूर
अल बारीक
इत्यादि
ईश्वर
पालनहार
रब
और जो जिस भाषा मे बोलता है सब अच्छे नाम उसी के है ।
* मा - बाप के साथ व्यवहार क्या सा ?
अर्थात : - तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें झिझको, बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो ।
( 17 : 23 )
( 17 : 24 , 25 )
*
अर्थात : - और वास्तव में तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुला रहे हो। ( 23 : 73 )
💐💐* आओ सच्चई की तरफ ! *💐💐
* पालनहार कहता है कहा जा रहा है मनुष्यों
तेरा रब तो करीम है , आ जाओ सच्चई की तरफ वो पिछली हर गलती माफ कर देंगा ।
आ जाओ सच्च दिल से ! 😢😢😢
يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ
अर्थात : - ऐ मनुष्य! किस चीज़ ने तुझे अपने उदार प्रभु के विषय में धोखे में डाल रखा हैं? ( 82 : 6 )
وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِلَّ قَوْمًۢا بَعْدَ إِذْ هَدَىٰهُمْ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم مَّا يَتَّقُونَ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيم
अर्थात : - अल्लाह ऐसा नहीं कि लोगों को पथभ्रष्ट ठहराए, जबकि वह उनको राह पर ला चुका हो, जब तक कि उन्हें साफ़-साफ़ वे बातें बता न दे, जिनसे उन्हें बचना है। निस्संदेह अल्लाह हर चीज़ को भली-भाँति जानता है । ( 9 : 15 )
* अब देखते है कि वेदों का ईश्वर कहा है और कैसा दिखता है ?
दोनों कूल्हे बृहस्पति लोक के थे
पूछ गतिमान वायु की तरह उससे वह पेड़ो को हिलाता है ।
( अथर्वेद 9 : 4 :14 )
* गूदा की नदियां है ,
त्वचा सूर्य की धूप है
पैरो को उठने वाले है ।
( अर्थवेद 9 : 4 : 14 )
* सूर्य सिर है ।
* अग्नि माथा है ।
* वायु आवाज़ है ।
* चन्द्र भेजा है ।
* आकाश ऊपर का जबड़ा है ।
*पृथ्वी नीचे का जबड़ा है ।
* बिजली जीभ है ।
* नक्षत्र गला है ।
* तारे कंधे है ।
* चलेने वाला सूरज गोद है ।
* मध्य अवकाश पेट है ।
* बृहस्पति हाथ है ।
* बड़ी दिशा हसली की हड्डियां है ।
* अग्नि , वायु ओर अपन वायु पसलि कि हड्डिय है ।
* प्राण वायु दोनों कंधे है ।
* बादल लंबी हाथ है ।
* शोधक प्रदार्थ बालो के जुड़ा है ।
* ब्राह्मण तत्व और ष्ट्रीयतत्व दोनों कुल्ह है ।
* बल दोनों जांघ है ।
* सविता दोनों घुटने है ।
* वर्कको दोनों अण्डकोष है ।
😢😢😢😢😢😊😊
* नदी नाडिया है ।
* स्तन बादल है ।
(अथर्वेद 9 : 7 : 1 to 14 )
( ऋग्विद 10 : 190 :3 )
(अथर्वेद 10 : 7 : 3 )
अर्थात: -हजार सिर वाला ,
हजार आंख वाला ,
हजार पैरों वाला
वह पृथ्वी उपादान कारण
ब्रह्याण्ड को सब ओर से 10 सो इद्रियों वाले शरीर को सबसे ऊपर में ठहरा रहता है ।
( ऋग्वेद 10 : 90 : 1 )
* ये तो थोड़े ही प्रमाण नही और बहुत कुछ है ?
* क्या तमाशा है ये वैदिक ईश्वर है या कोई प्राणि
आज तक तो ऐसे प्राणियों की खोज भी नही होइ है ?
☺️☺️☺️☺️☺️☺️
* ऐसा निराकार 😢😢😢😢😢😢
* इसलिए कहते है कि वेदिक ईश्वर से डरना चहिय !
( यजुर्वेद 40 : 1 )
* वह कहा है ?
* अर्थात : - एक तीन निर्माण शक्तियों और तीन पालन करने वाला को धारण करता हु
ऊपर स्तिथ हुआ ?
( अर्थवेद 9 : 9 :10 )
(ऋग्विद 1 : 164 :10 )
*उपर कहा है ये वैदिक ईश्वर अभी तक नासा वालो को मिला या नही ?
* कही कोई यान से टकरा कर नीचे तो नही गिर गया ?
* उत्तर का सूर्य नीचे नीचे गिरता है ।
* सूर्य नीचे नीचे गिरता है , तो उठा लो
😊😊😊😊😊👌
* जिसके घर शीशे के होते है ओ दूसरे के घरों पर पत्थर नही मारा करते
* हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।
(2-256).
(2-256).
*पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).
*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।
(81:27,28,29)(40:28)
(81:27,28,29)(40:28)
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).
* और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)
*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।
(17:81)
NOTE : - अल्हम्दुलिल्लाह जवाब तो हम दे सकते है पर इनके दिमाग मे जंग लगा है इसलिए जो जैसी भाषा समझता है उसे वैसे ही समझना पड़ता है ।
💐👌👌👌👌👌👌👌💐
* अगर किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा चाहता हु । 😢
* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधी को जवाब देना है जो खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के ऊपर तानाकाशी करते है।

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